● टूल्स / ब्राउज़र फ़िंगरप्रिंट स्कैन

देखें आपका ब्राउज़र
हर वेबसाइट को क्या बताता है

वेबसाइटें आपके ब्राउज़र से दर्जनों छोटी जानकारियाँ पढ़कर उन्हें एक ID में जोड़ देती हैं, जो कुकी के बिना भी आपका पीछा करती है। यह स्कैन हर सिग्नल और उसकी वैल्यू दिखाता है, ताकि आप देख सकें कि एंटीडिटेक्ट प्रोफ़ाइल में क्या सही होना ज़रूरी है।

आपकी फ़िंगरप्रिंट ID
आपका ब्राउज़र स्कैन हो रहा है…

सब कुछ आपके ब्राउज़र में ही गणना होता है। इस पेज की कोई भी चीज़ XProxy या कहीं और नहीं भेजी जाती।

दोबारा स्कैन करने पर ID वही रहनी चाहिए। यह नीचे दिए स्थिर सिग्नल (canvas, WebGL, ऑडियो, फ़ॉन्ट, navigator, स्क्रीन, टाइमज़ोन, प्लगइन) का हैश है।

Canvas

साइटें इसका क्या उपयोग करती हैं: आपका ब्राउज़र एक छिपी हुई इमेज बनाता है। आपके GPU, ड्राइवर और फ़ॉन्ट के छोटे-छोटे अंतर कुछ पिक्सल बदल देते हैं, और साइटें इस इमेज का हैश बनाकर एक स्थिर ID बना लेती हैं। एंटीडिटेक्ट ब्राउज़र नॉइज़ जोड़ते हैं या नतीजा बदल देते हैं; जो इमेज हर बार पढ़ने पर बदलती है, वह भी पकड़ में आ जाती है।

WebGL (ग्राफ़िक्स कार्ड)

साइटें इसका क्या उपयोग करती हैं: आपका ग्राफ़िक्स कार्ड, ड्राइवर और सीमाएँ बताता है। एंटी-फ़्रॉड सिस्टम जाँचते हैं कि GPU आपके User-Agent के ऑपरेटिंग सिस्टम से मेल खाता है या नहीं, और SwiftShader या llvmpipe जैसे सॉफ़्टवेयर रेंडरर हेडलेस बॉट या सर्वर की ओर इशारा करते हैं।

AudioContext

साइटें इसका क्या उपयोग करती हैं: मेमोरी में एक छोटी ध्वनि बनाता है, उसे बजाता नहीं। ऑडियो स्टैक के बारीक अंतर से एक स्थिर संख्या मिलती है, जो डिवाइस की एक और ID का काम करती है।

फ़ॉन्ट

साइटें इसका क्या उपयोग करती हैं: Windows, macOS और Linux में अलग-अलग फ़ॉन्ट आते हैं, इसलिए इंस्टॉल फ़ॉन्ट की सूची से असली ऑपरेटिंग सिस्टम पता चल जाता है। साइटें हर फ़ॉन्ट में एक टेस्ट स्ट्रिंग की चौड़ाई नापकर उन्हें ढूँढती हैं।

ब्राउज़र और navigator

साइटें इसका क्या उपयोग करती हैं: User-Agent, प्लैटफ़ॉर्म, भाषाएँ, CPU कोर और मेमोरी। साइटें इनकी आपस में और आपके IP एड्रेस के देश से तुलना करती हैं; कोई भी विरोधाभास आपका रिस्क स्कोर बढ़ा देता है।

क्लाइंट हिंट्स (userAgentData)

साइटें इसका क्या उपयोग करती हैं: Chromium ब्रांड, वर्शन, प्लैटफ़ॉर्म और आर्किटेक्चर को स्ट्रक्चर्ड डेटा के रूप में भेजता है। यह User-Agent स्ट्रिंग से मेल खाना चाहिए; हिंट्स अपडेट किए बिना बदला गया User-Agent एंटीडिटेक्ट की एक पुरानी गलती है।

स्क्रीन और विंडो

साइटें इसका क्या उपयोग करती हैं: रिज़ॉल्यूशन, पिक्सल रेशियो, कलर डेप्थ और विंडो का आकार। दुर्लभ या असंभव संयोजन आपको अलग पहचान दे देते हैं और नकली (एम्युलेटेड) डिवाइस उजागर कर देते हैं।

टाइमज़ोन और लोकेल

साइटें इसका क्या उपयोग करती हैं: आपका टाइमज़ोन और तारीख़ का फ़ॉर्मैट। साइटें टाइमज़ोन की तुलना आपके IP एड्रेस की लोकेशन से करती हैं; बेमेल होना प्रॉक्सी पकड़े जाने के सबसे आम संकेतों में से एक है।

प्लगइन और MIME टाइप

साइटें इसका क्या उपयोग करती हैं: सामान्य डेस्कटॉप Chrome अपना बिल्ट-इन PDF व्यूअर सूची में दिखाता है। खाली सूची हेडलेस और ऑटोमेटेड ब्राउज़र की पहचान है।

अनुमतियाँ

साइटें इसका क्या उपयोग करती हैं: कुछ अनुमतियों की मौजूदा स्थिति, बिना किसी की अनुमति माँगे पढ़ी गई। हेडलेस Chrome Notification.permission और Permissions API में अलग-अलग जवाब देने के लिए जाना जाता है।

मीडिया डिवाइस

साइटें इसका क्या उपयोग करती हैं: ब्राउज़र कितने माइक्रोफ़ोन, स्पीकर और कैमरे बताता है। असली डेस्कटॉप में लगभग हमेशा कम से कम एक स्पीकर होता है; सर्वर और वर्चुअल मशीन अक्सर कोई नहीं बताते।

ब्राउज़र फ़िंगरप्रिंट क्या है

फ़िंगरप्रिंट कोई एक वैल्यू नहीं है। वेबसाइट कई गुण पढ़ती है (ग्राफ़िक्स कार्ड, फ़ॉन्ट, स्क्रीन, भाषा, टाइमज़ोन और अन्य), उन्हें जोड़ती है और आपकी अगली विज़िट पर वही संयोजन पहचान लेती है, भले ही आपने कुकी मिटा दी हों या IP एड्रेस बदल लिया हो। ऊपर का हर सिग्नल सिर्फ़ एक सुराग है; साथ मिलकर वे आमतौर पर एक ब्राउज़र को दूसरे से अलग करने लायक काफ़ी सटीक होते हैं।

प्रॉक्सी और एंटीडिटेक्ट उपयोगकर्ताओं के लिए यह क्यों मायने रखता है

प्रॉक्सी आपका IP एड्रेस बदलती है, ब्राउज़र नहीं। अगर एक ही फ़िंगरप्रिंट पचास अकाउंट पर दिखे, तो वे अकाउंट आपस में जुड़ जाते हैं। अगर फ़िंगरप्रिंट IP से मेल न खाए, जैसे Apple GPU पर Windows User-Agent या US IP के साथ वियतनाम का टाइमज़ोन, तो अकाउंट फ़्लैग हो जाता है। AdsPower, GoLogin, Multilogin और Dolphin{anty} जैसे एंटीडिटेक्ट ब्राउज़र हर प्रोफ़ाइल के लिए अलग और आपस में मेल खाता फ़िंगरप्रिंट बनाते हैं।

इस नतीजे का उपयोग कैसे करें

इस पेज को किसी एक प्रोफ़ाइल के अंदर खोलें और ID नोट कर लें। फिर इसे दूसरी प्रोफ़ाइल में खोलें: ID अलग होनी चाहिए। पहली प्रोफ़ाइल को रीलोड करें: उसकी ID वही रहनी चाहिए। फिर एंटीडिटेक्ट हेल्थ चेक चलाएँ और देखें कि सिग्नल आपस में और आपकी प्रॉक्सी से मेल खाते हैं या नहीं।

सवाल

क्या यह पेज मेरा फ़िंगरप्रिंट कहीं भेजता है?

नहीं। हर सिग्नल आपके ब्राउज़र के अंदर ही पढ़ा और हैश किया जाता है और इसी पेज पर रहता है। स्कैन आपके डेटा के साथ कोई नेटवर्क रिक्वेस्ट नहीं करता, और टैब बंद करते ही वह मिट जाता है।

दोबारा स्कैन करने पर मेरी फ़िंगरप्रिंट ID क्यों बदल जाती है?

ऐसा नहीं होना चाहिए। अगर हर स्कैन पर canvas या audio बदलता है, तो आपका ब्राउज़र या एंटीडिटेक्ट प्रोफ़ाइल रैंडम नॉइज़ जोड़ रहा है, और कुछ साइटें इसे स्पूफ़िंग का संकेत मानती हैं। हर प्रोफ़ाइल के लिए एक तय नॉइज़ सीड इस्तेमाल करें, ताकि एक ही प्रोफ़ाइल हमेशा वही वैल्यू दिखाए।

यूनिक फ़िंगरप्रिंट अच्छा है या बुरा?

अपने आप में न अच्छा, न बुरा। रिस्क तब बढ़ता है जब कोई संयोजन असली डिवाइस के लिए असंभव हो (Windows User-Agent के साथ Apple GPU) या एक ही फ़िंगरप्रिंट कई अकाउंट पर दिखे। हर अकाउंट की अपनी, आपस में मेल खाती प्रोफ़ाइल होनी चाहिए।

क्या प्रॉक्सी मेरा ब्राउज़र फ़िंगरप्रिंट बदल सकती है?

नहीं। प्रॉक्सी आपका IP एड्रेस और नेटवर्क-स्तर (TCP/IP) का फ़िंगरप्रिंट बदलती है, ब्राउज़र जो बताता है उसे नहीं। ब्राउज़र की ओर के लिए आपको AdsPower, GoLogin या Multilogin जैसा एंटीडिटेक्ट ब्राउज़र चाहिए, जिसमें प्रोफ़ाइल प्रॉक्सी से मेल खाती हो।

फ़िंगरप्रिंट का नेटवर्क वाला हिस्सा

साइट को जो दिखता है, ब्राउज़र उसका सिर्फ़ आधा हिस्सा है। XProxy मोबाइल प्रॉक्सी आपको असली कैरियर IP और ऐसा TCP/IP फ़िंगरप्रिंट देती हैं जो आपके चुने डिवाइस से मेल खाता है, ताकि आपका एंटीडिटेक्ट प्रोफ़ाइल और आपका कनेक्शन एक ही कहानी कहें।

देखें XProxy कैसे काम करता है
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